Saturday, 2 July 2016

चार लाइनें....

तुम्हारे घर की शानो-शौकत हमको लगती है अजीब,      हम तो आने से रहे अब तेरी चौखट के करीब ।            माना क़ि तुम अमीर हो ,है बात सोलह आने ठीक             पर हमको प्यारी मुफलिसी है हम है अपने घर में ठीक।

                                 ------  संजीव शुक्ल अतुल