राजीव गांधी तकनीकी प्रगति के पक्षधर थे और अब उन्ही की पार्टी के नेता EVMके बजाय बैलेट पेपर से चुनाव करवाने का राग अलाप रहे है.अब इसे क्या कहें, प्रतिगामी मानसिकता या फिर सुविधावादी राजनीति की पक्षधरता। यह तो वही बात हुई कि मोटरगाड़ी के जमाने में बैलगाड़ी से यात्रा करने की वकालत करना। अपनी हार की असली वजहों को जानने के बजाय EVM में हार को तलाश करना दर्शाता है कि कांग्रेस अभी भी सकारात्मक राजनीति की इच्छुक नही है।
कांग्रेस को अपने ही दल के उन नेताओं पर गौर करना चाहिए जो दिग्भ्रमित पार्टी को सही दिशा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, अन्यथा पार्टी को अपने इतिहास पर गर्व करते-करते खुद ही इतिहास की विषयवस्तु बनते देर नही लगेगी ........
Saturday, 15 April 2017
*अपनी बात*
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