संजीव शुक्ल
Monday, 3 June 2019
नमामि घोटाले
घोटाले निराकार, निर्गुण होते हैं। वो ईश्वर की भांति होते हैं। जिस तरह ईश्वर होता तो है पर दिखाई नही देता, ठीक उसी तरह घोटाले होते तो हैं पर दिखते नहीं।
- संजीव शुक्ल
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
No comments:
Post a Comment