Monday, 3 June 2019

नमामि घोटाले

घोटाले निराकार, निर्गुण होते हैं। वो ईश्वर की भांति होते हैं। जिस तरह ईश्वर होता तो है पर दिखाई नही देता, ठीक उसी तरह घोटाले होते तो हैं पर दिखते नहीं।
                                  - संजीव शुक्ल

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