Saturday, 11 May 2013

अब देश बन गया मधुशाला

           लोकतंत्र  में  लोक नहीं ,है केवल तंत्रों का जाला
           लोग पी रहें हैं मन भर अब देश बन गया मधुशाला।
           पाखंडी सरकार चलाते ,देश-प्रेम का स्वांग रचाते
           जन -सेवक का ओढ़ लबादा ,कुर्सी पर अधिकार जताते .
           सत्ता की मदहोशी में तुमने  क्या -क्या है कर डाला
           लोग पी रहें हैं मन-भर .अब देश बन गया मधुशाला।
           वोट की खातिर मजहब बांटें ,जाति -धर्म पर प्रेम दिखाते .
           आपस  में में लड़वाकर सबको ,गीता का उपदेश सुनाते .
           लोकतंत्र के रंगमंच पर घोटालों का नया पियाला
            लोग पी रहें हैं मन-भर .अब देश बन गया मधुशाला।

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