जाति के वर्चस्व को लेकर यहाँ संघर्ष है ,
आपसी सदभावनाओ की चिता जलने लगी।
कौन किसको चाहता है क्या करोगे जानकर ,
अब तो हर एक होलिका की गोद में प्रहलाद है।।
_संजीव शुक्ल "अतुल "
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