श्वेत
वस्त्र धारे अंब जननि हमारी
तुम
आपके ही हाथ का सहारा
हम सबको
राह भरी कंटकों से, मंजिल बहुत दूर
चलता रहूँगा माँ, दिखाओ
राह हमको
ख्यातिप्राप्त नाम
आप जननी उदारमना
हम हैं अनाम, आप नाम
दे दो हमको
कामना है एक, मातु देश के लिए जीऊँ मैं
राखूँ
मान देश का, सवारूँ देश-धन को । ।
-संजीव शुक्ल ‘अतुल’
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