Wednesday, 19 December 2018

नागार्जुन जी हिंदी साहित्य के अप्रतिम कवि हैं। भाषा के स्तर पर भी और शिल्प के स्तर पर भी। वह सिर्फ़ इसलिए स्मरणीय नहीं हैं कि उन्होंने बंग्ला,मैथिली और हिंदी में बहुत कुछ रचा बल्कि वह इसलिए स्मरणीय हैं कि इन्होंने जनसाहित्य को रचा; आप इसलिए भी स्मरणीय हैं कि आपने अपने साहित्य में आमजन को नायकत्व प्रदान किया। आमजन की व्यथा-कथा आपके रचनाकर्म की विषयवस्तु बनी ......यह साहित्य की एक नयी प्रगतिधर्मी चेतना थी जो अपनी संवेदनशीलता से साहित्य को अपनी ही तरह से समृद्ध कर रही थी।
 आपने कथित लोकतंत्री व्यवस्था के उस पक्ष पर प्रहार किया जो समाजवाद के नाम पर सत्ता में आया था पर पूंजीवादी तत्वों से गठजोड़ कर स्वहितों को बढ़ावा दे रहा था। बाबा ने इस सफेदपोशी छलछद्म को अनावृत्त कर दिया। कहना न होगा कि बाबा ने शोषित-असहाय जनसामान्य की मूकवेदना को स्वर दिया।
   बाबा नागार्जुन मानवीय संवेदनाओं और व्यंग्य के अप्रतिम कवि हैं। सामाजिक, राजनीतिक और धार्मिक पाखंडों पर कटाक्ष करने में  उनका कोई मुकाबला नहीं। जब नामवर सिंह जी यह कहते हैं कि "यह निर्विवाद है कि कबीर के बाद हिंदी कविता में नागार्जुन से बड़ा व्यंग्यकार अभी तक कोई नही हुआ"  तो यूं ही नहीं कहते। उनकी एक कविता मन्त्र है जो मौजूदा दौर के जीवन के सभी पक्षों विशेष रूप से सामाजिक औ राजनैतिक पक्षों में विद्यमान वीभत्सता पर गहरा प्रहार करती है। हिंदी काव्य-जगत की बेहद चर्चित इस  कविता में भारतीय परम्परा के सर्वाधिक पवित्र रूप-विधान (मंत्र) का उपयोग समकालीन राजनीति के सर्वाधिक अपवित्र पक्ष को व्यक्त करने के लिए किया गया है। यह भी एक व्यंग्य का तरीका है.जो बाबा नागार्जुन ही कर सकतेहैं... .यह शिल्प के स्तर पर एक अद्भुत प्रयोग है .......  देखें

रचनाकार: नागार्जुन

ॐ श‌ब्द ही ब्रह्म है..
ॐ श‌ब्द्, और श‌ब्द, और श‌ब्द, और श‌ब्द
ॐ प्रण‌व‌, ॐ नाद, ॐ मुद्रायें
ॐ व‌क्तव्य‌, ॐ उद‌गार्, ॐ घोष‌णाएं
ॐ भाष‌ण‌...
ॐ प्रव‌च‌न‌...
ॐ हुंकार, ॐ फ‌टकार्, ॐ शीत्कार
ॐ फुस‌फुस‌, ॐ फुत्कार, ॐ चीत्कार
ॐ आस्फाल‌न‌, ॐ इंगित, ॐ इशारे
ॐ नारे, और नारे, और नारे, और नारे

ॐ स‌ब कुछ, स‌ब कुछ, स‌ब कुछ
ॐ कुछ न‌हीं, कुछ न‌हीं, कुछ न‌हीं
ॐ प‌त्थ‌र प‌र की दूब, ख‌रगोश के सींग
ॐ न‌म‌क-तेल-ह‌ल्दी-जीरा-हींग
ॐ मूस की लेड़ी, क‌नेर के पात
ॐ डाय‌न की चीख‌, औघ‌ड़ की अट‌प‌ट बात
ॐ कोय‌ला-इस्पात-पेट्रोल‌
ॐ ह‌मी ह‌म ठोस‌, बाकी स‌ब फूटे ढोल‌

ॐ इद‌मान्नं, इमा आपः इद‌म‌ज्यं, इदं ह‌विः
ॐ य‌ज‌मान‌, ॐ पुरोहित, ॐ राजा, ॐ क‌विः
ॐ क्रांतिः क्रांतिः स‌र्व‌ग्वंक्रांतिः
ॐ शांतिः शांतिः शांतिः स‌र्व‌ग्यं शांतिः
ॐ भ्रांतिः भ्रांतिः भ्रांतिः स‌र्व‌ग्वं भ्रांतिः
ॐ ब‌चाओ ब‌चाओ ब‌चाओ ब‌चाओ
ॐ ह‌टाओ ह‌टाओ ह‌टाओ ह‌टाओ
ॐ घेराओ घेराओ घेराओ घेराओ
ॐ निभाओ निभाओ निभाओ निभाओ

ॐ द‌लों में एक द‌ल अप‌ना द‌ल, ॐ
ॐ अंगीक‌रण, शुद्धीक‌रण, राष्ट्रीक‌रण
ॐ मुष्टीक‌रण, तुष्टिक‌रण‌, पुष्टीक‌रण
ॐ ऎत‌राज़‌, आक्षेप, अनुशास‌न
ॐ ग‌द्दी प‌र आज‌न्म व‌ज्रास‌न
ॐ ट्रिब्यून‌ल‌, ॐ आश्वास‌न
ॐ गुट‌निरपेक्ष, स‌त्तासापेक्ष जोड़‌-तोड़‌
ॐ छ‌ल‌-छंद‌, ॐ मिथ्या, ॐ होड़‌म‌होड़
ॐ ब‌क‌वास‌, ॐ उद‌घाट‌न‌
ॐ मारण मोह‌न उच्चाट‌न‌

ॐ काली काली काली म‌हाकाली म‌हकाली
ॐ मार मार मार वार न जाय खाली
ॐ अप‌नी खुश‌हाली
ॐ दुश्म‌नों की पामाली
ॐ मार, मार, मार, मार, मार, मार, मार
ॐ अपोजीश‌न के मुंड ब‌ने तेरे ग‌ले का हार
ॐ ऎं ह्रीं क्लीं हूं आङ
ॐ ह‌म च‌बायेंगे तिल‌क और गाँधी की टाँग
ॐ बूढे की आँख, छोक‌री का काज‌ल
ॐ तुल‌सीद‌ल, बिल्व‌प‌त्र, च‌न्द‌न, रोली, अक्ष‌त, गंगाज‌ल
ॐ शेर के दांत, भालू के नाखून‌, म‌र्क‌ट का फोता
ॐ ह‌मेशा ह‌मेशा राज क‌रेगा मेरा पोता
ॐ छूः छूः फूः फूः फ‌ट फिट फुट
ॐ श‌त्रुओं की छाती अर लोहा कुट
ॐ भैरों, भैरों, भैरों, ॐ ब‌ज‌रंग‌ब‌ली
ॐ बंदूक का टोटा, पिस्तौल की न‌ली
ॐ डॉल‌र, ॐ रूब‌ल, ॐ पाउंड
ॐ साउंड, ॐ साउंड, ॐ साउंड

ॐ ॐ ॐ
ॐ ध‌रती, ध‌रती, ध‌रती, व्योम‌, व्योम‌, व्योम‌, व्योम‌
ॐ अष्ट‌धातुओं के ईंटो के भ‌ट्टे
ॐ म‌हाम‌हिम, म‌हम‌हो उल्लू के प‌ट्ठे
ॐ दुर्गा, दुर्गा, दुर्गा, तारा, तारा, तारा
ॐ इसी पेट के अन्द‌र स‌मा जाय स‌र्व‌हारा
ह‌रिः ॐ त‌त्स‌त, ह‌रिः ॐ त‌त्स‌त‌

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