Monday, 21 August 2017

मौजूदा दौर

व्यवस्थागत बदलाव अभी भी एक यक्ष प्रश्न बना हुआ है। जिले स्तर के जितने भी कार्यालय है उनकी कार्यप्रणाली यथापूर्व ही है। सारी समस्याएं और उन  समस्याओं को दूर करने की वह सभी सुविधाएं जो पूर्ववर्ती सरकारों में उपलब्ध थीं, आज भी सहज उपलब्ध है। ऑनलाइन शिकायती तन्त्र होने के बावजूद समस्याओं का निस्तारण उन्ही अधिकारियों से कराया जाता है जिनके खिलाफ शिकायत है और यह सब योगी जैसे ईमानदार,कर्मठ व समाजसेवी मुख्यमंत्री के रहते हो रहा है......दुष्यंत कुमार की इन लाइनों से ही अपनी बात खत्म कर रहा हूं.....
"मैं बेपनाह अँधेरों को सुबह कैसे कहूँ
मैं इन नजारों का अंधा तमाशबीन नहीं"
                     - संजीव शुक्ल अतुल

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