Monday, 28 August 2017

गांधारी प्रवृत्ति

अंध समर्थन और अंध विरोध दोनों ही कभी भी सार्थक दिशा नही दे सकते उल्टे ये प्रतिगामी विचारधारा के पोषक बन सामाजिक सद्भाव को खण्डित करते हैं। यह प्रवृत्ति गांधारी की तरह है जो जानबूझकर  यथार्थ का साक्षात्कार न करने की नीयत से अपनी आंखों पर पट्टी बांध लेती है ......यह प्रवृत्ति सामाजिक दायित्व के बोध से परे निजी लाभ और सम्बन्धों को सर्वोपरि मान उसी के हिसाब से अपनी राह तय करती है। आज की राजनीति में यह गांधारी प्रवृत्ति खूब फल-फूल रही है ......

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